सज्जनों ! अब विश्राम को छोड़ो दुर्जन अपने आप पस्त हो जाएंगे
  • ByVikas
  • OnApril 22, 2012
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पूज्य स्वामी रामदेव ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि कार्य कर्ताओं को अपने मनोबल को चेतना के उच्चत्तम स्तर पर बनाए रखने की जरूरत है। उन्होने कहा कि मैं करोड़ों लोगों से मिला हूँ और लाखो लोगों के मनोभावों को पढ़ा है  सबके माइंड  सेट  (मानसिक स्तर)  अलग -अलग है । कोई अध्यात्म की , कोई भौतिक जगत की,कोई वेदान्त की और कोई  कानून की बात कहता है -समझता है।  इनमें  से प्रत्येक अपना  पक्ष मनवाने के लिए उसे   बहुत ही प्रभावशाली ढंग से दूसरों के समक्ष रखता हे। कोई इस जगत को सत्य बताता है तो कोई  ब्रह्म को। किन्तु उनके अनुसार ये दोनों ही अपनी अपनी जगह सत्य हैं। एक अपरा  विज्ञान है तो दूरसा परा विज्ञान ।  लौग आपको आपकी राह से भटकने के लिए भांति -भांति के तर्को और कुतर्कों का प्रयोग करतें हैं । कहतें हैं कि आज से पहले किंतने ही महापुरुष आए और चले गए पर देश की स्थिति न बदली है और न बदलेगी । लोग आपके समक्ष प्रत्येक बात में  तरह तरह के संशय खड़े कर देते हैं । इसी लिए मैं आपको आपके माइंड को  भिन्न भिन्न फ्रिक्वेंसियों पर सेट करता हूँ आपको तैयार करता करता हूँ । किसी को  न्याय की,किसी को  कानून की,किसी को अध्यात्म की भाषा में  समझ आता है । यदि कोई समझले तो ठीक नहीं तो उसी से पुछ लें के यदि हम सत्य की लडाई लड़ रहें हैं तो इसमे गलत क्या है? हमारे मन के विचारों  का / सेवा का  प्रवाह टूटने नहीं देना है । यह स्थिति समाज में अन्यन्त्र भी   देखने में  आती है और फिर हताशा से निबटने के लिए, ठंडे लोगो उठाने के लिए मोटिवेटर बुलाने पड़ते हैं। स्वामी जी आगे कहते हैं की आपको अपने चिंतन की धार को बनाए रखना हैं , ऊर्जा भरने वाले वैदिक वीर मंत्रों का पाठ करना है। एक अप्सेट आदमी भी अन्य सभी को भी अप्सेट कर देता है। अत: आपकी अपनी फ्रीक्वेनसी डिवाइन मोड़े में सेट  होनी चाहिए। वो कहतें हैं कि बुरे लोग अप्सेट होने पर शराब पीते हैं हमें  योग करना चाहिए । अपने पूर्वजों राम कृष्ण बुध आदि  का ध्यान करना चाहिए । कार्य कर्ताओं को माइंड सेट कि बात करते हुए स्वामी जी कहतें है कि कुछ तो प्यार से मानते हैं , कुछ मानतें नहीं और कुछ तो आगे काम करने से भी माना करतें हैं । अर्जुन को भी इसी हालात से भगवान कृष्ण ने बार बार उबरा था। मैं भी तुम्हारे अप्सेट होने पर तुम्हारा माइंड सेट बार-बार करूंगा , मैं क्यूँ अपने कर्तव्य से विमुख होऊँ ! आपको  अपने साथ अपने परमात्मा , अपने सत्य को साथ रख अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना है । एक जाग्रत पुरुष की भांति आपको  अपने चित्त की नाव को ऊपर की ओर ही खेना  है। स्वामी जी आशा व्यक्त करते हैं कि जल्द ही सुख का सवेरा होने को है रात का अँधियारा मिट जाएगा । सब अपनो के बारे में सोचते हे -कुछ लोग ऐसे हों जो  सबके बारें में सोचें । जिसको कुछ पाना है उसे कुछ नहीं मिलता और जिसे कुछ नहीं चाहिए उसे सब कुछ मिलता है फिर भी वह निर्लिप्त जीता है। हमे सबको जगाना है । सके अंदर एक ही चेतन आत्मा है और वह चेतना केवल सत्य को ही स्वीकार करती है। 


इस अवसर पर जानाब रिजवी साहब ने आपने विचार रखते हुए कहा कि सबको साथ साथ चलना है जीतने के लिए और जिसकी रगों में भारत का पाक लहुं बह रहा हो उसे क्या सोचना ! इंकलाब कि आवाज बाबा रामदेव कि आवाज है – जब भी बोलें ज़ोर से बोलें , ये आवाज दिल्ली तक जाती हैं । उनहने कहा कि राम देव जी को हमसे कुछ नहीं चाहिए । इन्होने देश को दिया ही है कुछ लिया नहीं। देश मैं सबकी नीयतों पर शंका हो सकती है पर बाबा रामदेव पर नहीं । उन्होने कहा जुड़े रहिए और आगे बढ़िए ।
स्वामी राम देव ने इस पर कहा कि यह एक मुस्लिम भाई कि बात नहीं अपितु अब सबको समझ आ रहा हे और देश में प्रेम की धारा बह निकली है । उन्होने सज्जनों से आव्हान किया कि  अब विश्राम को छोड़ो  दुर्जन अपने आप पस्त हो जाएंगे ।
इस अवसर पर विद्वान आचार्य एवं बाबा भूपेंदर जी ने भी कार्यकर्ताओं में आत्मविश्वास जगाने हेतु जोशीले कथन कहे

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